ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3434.6वाल्मीकि रामायण 34.6कन्दर्प सम रूपः च रामो दशरथ आत्मजः । शक्र चाप निभम् चापम् विकृष्य कनकांगदम् ॥३-३४-६॥पिछलाअगलापूरा अध्याय