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वाल्मीकि रामायण 34.17

तप्त कांचन वर्ण आभा रक्त तुंग नखी शुभा ।
सीता नाम वरारोहा वैदेही तनु मध्यमा ॥३-३४-१७॥

पूरा अध्याय