ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3333.15वाल्मीकि रामायण 33.15तीक्ष्णम् अल्प प्रदातारम् प्रमत्तम् गर्वितम् शठम् । व्यसने सर्व भूतानि न अभिधावन्ति पार्थिवम् ॥३-३३-१५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय