ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3232.2वाल्मीकि रामायण 32.2दूषणम् च खरम् चैव हतम् त्रिशिरसम् रणे । दृष्ट्वा पुनर् महानादम् ननाद जलद उपमा ॥३-३२-२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय