ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 3232.18वाल्मीकि रामायण 32.18पुरा स्वयंभुवे धीरः शिरांसि उपजहार यः । देव दानव गधर्व पिशाच पतग उरगैः ॥३-३२-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय