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वाल्मीकि रामायण 32.15

विमानम् पुष्पकम् तस्य कामगम् वै जहार यः ।
वनम् चैत्ररथम् दिव्यम् नलिनीम् नंदनम् वनम् ॥३-३२-१५॥

पूरा अध्याय