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वाल्मीकि रामायण 31.50

एवम् उक्तो दशग्रीवो मारीचेन स रावणः ।
न्यवर्तत पुरीम् लंकाम् विवेश च गृह उत्तमम् ॥३-३१-५०॥

पूरा अध्याय