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वाल्मीकि रामायण 31.48

चापापहारे भुज वेग पंकेशर ऊर्मिमाले सु महा आहव ओघे ।
न राम पाताल मुखे अति घोरेप्रस्कन्दितुम् राक्षस राज युक्तम् ॥३-३१-४८॥

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