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वाल्मीकि रामायण 31.46

विशुद्ध वंश अभिजना अग्र हस्तःतेजो मदः संस्थित दोर्??? विषाणः ।
उदीक्षितुम् रावण न इह युक्तःस संयुगे राघव गन्धि हस्ती ॥३-३१-४६॥

पूरा अध्याय