Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 31.35

स रथो राक्षस इंद्रस्य नक्षत्र पथगो महान् ।
चंचूर्यमानः शुशुभे जलदे चंद्रमा इव ॥३-३१-३५॥

पूरा अध्याय