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वाल्मीकि रामायण 30.41

ततः तु तम् राक्षस संघ मर्दनम्स पूज्यमानम् मुदितैः महात्मभिः ।
पुनः परिष्वज्य मुदा अन्वित आननाबभूव हृष्टा जनक आत्मजा तदा ॥३-३०-४१॥

पूरा अध्याय