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वाल्मीकि रामायण 30.36

एषाम् वध अर्थम् शत्रूणाम् रक्षसाम् पाप कर्मणाम् ।
तत् इदम् नः कृतम् कार्यम् त्वया दशरथ आत्मज ॥३-३०-३६॥

पूरा अध्याय