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वाल्मीकि रामायण 29.4

कर्म लोक विरुद्धम् तु कुर्वाणम् क्षणदा चर ।
तीक्ष्णम् सर्व जनो हन्ति सर्पम् दुष्टम् इव आगतम् ॥३-२९-४॥

पूरा अध्याय