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वाल्मीकि रामायण 29.2

गज अश्व रथ संबाधे बले महति तिष्ठता ।
कृतम् सुदारुणम् कर्म सर्व लोक जुगुप्सितम् ॥३-२९-२॥

पूरा अध्याय