ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 2929.18वाल्मीकि रामायण 29.18प्राकृताः तु अकृत आत्मानो लोके क्षत्रिय पांसनाः । निरर्थकम् विकत्थन्ते यथा राम विकत्थसे ॥३-२९-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय