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वाल्मीकि रामायण 28.9

शर जाल आवृतः सूर्यो न तदा स्म प्रकाशते ।
अन्योन्य वध संरम्भात् उभयोः संप्रयुध्यतोः ॥३-२८-९॥

पूरा अध्याय