ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 2727.18वाल्मीकि रामायण 27.18शिरांसि अपातयत् त्रीणि वेगवद्भिः त्रिभिः शतैः । स धूम शोणित उद्गारी राम बाण अभिपीडितः ॥३-२७-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय