ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 2626.9वाल्मीकि रामायण 26.9शिरो जहार तद् रक्षः त्रिभिर् विव्याध वक्षसि । स च्छिन्न धन्वा विरथो हत अश्वो हत सारथिः ॥३-२६-९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय