ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 2424.4वाल्मीकि रामायण 24.4अमी रुधिर धाराः तु विसृजंतो खर स्वनाः । व्योम्नि मेघा निवर्तन्ते परुषा गर्दभ अरुणाः ॥३-२४-४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय