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वाल्मीकि रामायण 24.1

आश्रमम् प्रति याते तु खरे खर पराक्रमे ।
तान् एव औत्पातिकान् रामः सह भ्रात्रा ददर्श ह ॥३-२४-१॥

पूरा अध्याय