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वाल्मीकि रामायण 23.13

उत्पेतुः च विना रात्रिम् ताराः खद्योतन प्रभाः ।
संलीन मीन विहगा नलिन्यः शुष्क पंकजाः ॥३-२३-१३॥

पूरा अध्याय