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वाल्मीकि रामायण 22.20

राक्षसानाम् सुघोराणाम् सहस्राणि चतुर्दश ।
निर्यातानि जन स्थानात् खर चित्त अनुवर्तिनाम् ॥३-२२-२०॥

पूरा अध्याय