ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 2121.22वाल्मीकि रामायण 21.22भ्रातुः समीपे शोक आर्ता नष्ट संज्ञा बभूव ह । कराभ्याम् उदरम् हत्वा रुरोद भृश दुःखिता ॥३-२१-२२॥पिछलापूरा अध्याय