ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 2121.15वाल्मीकि रामायण 21.15दण्डकारण्य निलयम् जहि राक्षस कण्टकम् । यदि रामम् अमित्रघ्नम् न त्वम् अद्य वधिष्यसि ॥३-२१-१५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय