ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 2121.12वाल्मीकि रामायण 21.12विषाद नक्र अध्युषिते परित्रास ऊर्मि मालिनि । किम् माम् न त्रायसे मग्नाम् विपुले शोक सागरे ॥३-२१-१२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय