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वाल्मीकि रामायण 2.6

वसानम् चर्म वैयाघ्रम् वस आर्द्रम् रुधिरोक्षितम् ।
त्रासनम् सर्व भूतानाम् व्यादितास्यम् इव अन्तकम् ॥३-२-६॥

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