ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 22.25वाल्मीकि रामायण 2.25राज्य कामे मम क्रोधो भरते यो बभूव ह । तम् विराधे विमोक्ष्यामि वज्री वज्रम् इव अचले ॥३-२-२५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय