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वाल्मीकि रामायण 2.25

राज्य कामे मम क्रोधो भरते यो बभूव ह ।
तम् विराधे विमोक्ष्यामि वज्री वज्रम् इव अचले ॥३-२-२५॥

पूरा अध्याय