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वाल्मीकि रामायण 18.22

निकृत्त कर्ण नासा तु विस्वरम् सा विनद्य च ।
यथा आगतम् प्रदुद्राव घोरा शूर्पणखा वनम् ॥३-१८-२२॥

पूरा अध्याय