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वाल्मीकि रामायण 17.27

इमाम् विरूपाम् असतीम् करालाम् निर्णत उदरीम् ।
अनेन सह ते भ्रात्रा भक्षयिष्यामि मानुषीम् ॥३-१७-२७॥

पूरा अध्याय