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वाल्मीकि रामायण 17.20

श्रूयताम् राम वक्ष्यामि तत्त्वार्थम् वचनम् मम ।
अहम् शूर्पणखा नाम राक्षसी कामरूपिणी ॥३-१७-२०॥

पूरा अध्याय