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वाल्मीकि रामायण 16.24

बाष्प संचन्न सलिला रुत विज्ञेय सारसाः ।
हिमाअर्द्र वालुकैः तीरैः सरितो भान्ति सांप्रतम् ॥३-१६-२४॥

पूरा अध्याय