ग्रंथवाल्मीकि रामायणअरण्यकाण्डसर्ग 1616.20वाल्मीकि रामायण 16.20अवश्याय निपातेन किंचित् प्रक्लिन्न शाद्वला । वनानाम् शोभते भूमिर् निविष्ट तरुण आतपा ॥३-१६-२०॥पिछलाअगलापूरा अध्याय