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वाल्मीकि रामायण 15.13

हंस कारण्डव आकीर्णा चक्रवाक उपशोभिता ।
न अतिदूरे न च आसन्ने मृग यूथ निपीडिता ॥३-१५-१३॥

पूरा अध्याय