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वाल्मीकि रामायण 13.2

अध्व श्रमेण वाम् खेदो बाधते प्रचुर श्रमः ।
व्यक्तम् उत्कण्ठते वा अपि मैथिली जनक आत्मजा ॥३-१३-२॥

पूरा अध्याय