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वाल्मीकि रामायण 12.33

अमोघः सूर्य संकाशो ब्रह्मदत्तः शर उत्तमः ।
दत्तो मम महेन्द्रेण तूणी च अक्षय सायकौ ॥३-१२-३३॥

पूरा अध्याय