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वाल्मीकि रामायण 12.15

दर्शयामास काकुत्स्थम् सीताम् च जनकात्मजाम् ।
तम् शिष्यः प्रश्रितम् वाक्यम् अगस्त्य वचनम् ब्रुवन् ॥३-१२-१५॥

पूरा अध्याय