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वाल्मीकि रामायण 12.1

स प्रविश्य आश्रम पदम् लक्ष्मणो राघव अनुजः ।
अगस्त्य शिष्यम् आसाद्य वाक्यम् एतद् उवाच ह ॥३-१२-१॥

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