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वाल्मीकि रामायण 11.66

सो अभ्यद्रवत् द्विजेंद्रम् तम् मुनिना दीप्त तेजसा ।
चक्षुषा अनल कल्पेन निर्दग्धो निधनम् गतः ॥३-११-६६॥

पूरा अध्याय