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वाल्मीकि रामायण 11.41

तत्र अगस्त्य आश्रम पदम् गत्वा योजनम् अन्तरम् ।
रमणीये वनोद्देशे बहु पादप शोभिते ॥३-११-४१॥

पूरा अध्याय