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वाल्मीकि रामायण 1.2

कुश चीर परिक्षिप्तम् ब्राह्म्या लक्ष्म्या समावृतम् ।
यथा प्रदीप्तम् दुर्दर्शम् गगने सूर्य मण्डलम् ॥३-१-२॥

पूरा अध्याय