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वाल्मीकि रामायण 99.41

ततः सुमन्त्रेण गुहेन चैव समीयतू राजसुतावरण्ये।
दिवाकरश्चैव निशाकरश्च यथाम्बरे शुक्रबृहस्पतिभ्याम् ॥ २.९९.४१॥

पूरा अध्याय