ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 99.51वाल्मीकि रामायण 9.51चंद्रमाह्वयमानेन मुखेनाप्रतिमानना। गमिष्यसि गतिं मुख्यांगर्वयन्ती द्विषज्जने ॥२-९-५१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय