ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 99.41वाल्मीकि रामायण 9.41त्वं पद्ममिव वातेन सन्नता प्रियदर्शना । उरस्तेऽभिनिविष्टं वै यावत् स्कन्धात्समुन्नतम् ॥२-९-४१॥पिछलाअगलापूरा अध्याय