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वाल्मीकि रामायण 9.24

दयिता त्वं सदा भर्तुरत्र मे नास्ति संशयः ।
त्वत्कृते स महाराजो विशेदपि हुताशनम् ॥२-९-२४॥

पूरा अध्याय