ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 8888.4वाल्मीकि रामायण 88.4अजिन उत्तर सम्स्तीर्णे वर आस्तरण सम्चये । शयित्वा पुरुष व्याघ्रः कथम् शेते मही तले ॥२-८८-४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय