ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 8888.24वाल्मीकि रामायण 88.24शून्य सम्वरणा रक्षाम् अयन्त्रित हय द्विपाम् । अपावृत पुर द्वाराम् राज धानीम् अरक्षिताम् ॥२-८८-२४॥पिछलाअगलापूरा अध्याय