ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 8888.22वाल्मीकि रामायण 88.22अकर्ण धारा पृथिवी शून्या इव प्रतिभाति मा । गते दशरथे स्वर्गे रामे च अरण्यम् आश्रिते ॥२-८८-२२॥पिछलाअगलापूरा अध्याय