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वाल्मीकि रामायण 88.16

मन्ये भर्तुः सुखा शय्या येन बाला तपस्विनी ।
सुकुमारी सती दुह्खम् न विजानाति मैथिली ॥२-८८-१६॥

पूरा अध्याय