ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 8787.8वाल्मीकि रामायण 87.8वत्सला स्वम् यथा वत्सम् उपगूह्य तपस्विनी । परिपप्रग्च्Cअ भरतम् रुदन्ती शोक लालसा ॥२-८७-८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय