ग्रंथवाल्मीकि रामायणअयोध्याकाण्डसर्ग 8787.3वाल्मीकि रामायण 87.3प्रत्याश्वस्य मुहूर्तम् तु कालम् परम दुर्मनाः । पपात सहसा तोत्रैर् हृदि विद्ध इव द्विपः ॥२-८७-३॥पिछलाअगलापूरा अध्याय